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RAFALE लड़ाकू विमान क्यों शामिल किये गए '17 Squadron Golden Arrows' में- Defence India News

 

अम्बाला वायु सेना स्टेशन राफेल लड़ाकू जेट के पहले बैच का घर होगा। भारतीय वायु सेना को अंबाला स्थित 17 स्क्वाड्रन गोल्डन एरो के लिए एक induction  ceremony  आयोजित किया गया जो मल्टीरोल लड़ाकू विमान संचालित करेगा| 17 स्क्वाड्रन राफेल जेट को उड़ाने वाली भारतीय वायु सेना की पहली squadron होगी।

 

जानिये क्यों चुना गया है 17 Squadron Golden Arrows को भारतीय वायु सेना के लिए?

'GOLDEN ARROWS' ’के बारे में सभी कुछ जानें:

  • 17 स्क्वाड्रन का गठन 1 अक्टूबर, 1951 को Flight Lieutenant DL Springett  की कमान में अंबाला में किया गया था और फिर इसे Harvard-II B aircraft से लैस किया गया था।
  • नवंबर 1955 तक, स्क्वाड्रन पूरी तरह से De Havilland Vampire aircraft में बदल गया और 1957 तक  Hawker Hunter aircraft 'गोल्डन एरो' द्वारा उड़ाए गए। स्क्वाड्रन 1975 में Mig-21 M में परिवर्तित हो गया।
  • स्क्वाड्रन, जो पहले भटिंडा एयरबेस से संचालित था, 2016 में IAF द्वारा रूसी मूल केMig 21 jets से धीरे-धीरे चरणबद्ध होने के बाद भंग कर दिया गया था।
  • स्क्वाड्रन ने दिसंबर 1961 में गोवा मुक्ति अभियान में और 1965 में एक आरक्षित बल के रूप में सक्रिय रूप से भाग लिया।
  • विंग कमांडर एन चतरथ की कमान के तहत, 17 स्क्वाड्रन ने 1971 के भारत-पाक युद्ध में भाग लिया और कई वीरता पुरस्कार प्राप्त करते हुए, नजदीकी हवाई समर्थन, काउंटर-एयर और फाइटर रिकस मिशनों को उड़ान भरी।

बता दे राफेल का दूसरा स्क्वाड्रन चीनी खतरे की देखभाल के लिए पश्चिम बंगाल में हासीमारा बेस पर तैनात किया जाएगा।

लंबे समय तक प्रतीक्षा करने के बाद भारतीय वायुसेना द्वारा राफेल जेट्स के नाम "गेम-चेंजर" “ब्यूटी एंड द बीस्ट” करार दिए गए| भारतीय वायुसेना की  ताकत  को दोगुनी - चौगुनी करने  में  सक्षम  राफेल  की खासियत क्या है :

  • फ्रांसीसी विमानन फर्म डसॉल्ट द्वारा निर्मित राफेल  फाइटर जेट्स को  खास तौर पर 3 तरह से  बनाया  जाता  है
  • पहला एक सीट वाला जमीन (एयरबेस) से संचालित विमान
  • दूसरा दो सीट वाला जमीन से संचालित विमान
  • तीसरा एक सीट वाला एयरक्राफ्ट कैरियर से संचालित होने वाला विमान जिसका इस्तेमाल नौसेना करती है
  • दो सीट वाले राफेल  विमानों की  खासियत :
  • दो सीट वाले ट्रेनर विमान उनका इस्तेमाल आम तौर पर पायलटों को ट्रेनिंग के लिए किया जाएगा
  • इनका मुख्य उद्देश्य प्रशिक्षण देना ही होता है और इसी बात को ध्यान में रखते हुए इन्हें बनाया जाता है
  • पहले इन विमानों पर भारतीय वायुसेना के पायलटों को फ्रांस के पायलट ट्रेनिंग देंगे और आने वाले समय में वायुसेना अपने नए पायलटों को इनकी मदद से प्रशिक्षण देने का काम करेगी
  • राफेल के अचूक निशाने से दुश्मन किसी तरह नहीं बच सकता अगर बिना पे लोड की बात करें तो राफेल का वजन 10 टन है
  • अगर यह मिसाइल्स के साथ उड़ान भरता है तो इसका वजन 25 टन तक हो जाता है
  • राफेल स्टील्थ टेक्नोलॉजी से लैस है
  • यह दुश्मन के रडार को चकमा देने के ताकत रखता है
  • साथ ही इसे इस हिसाब से डिजाइन किया गया है कि यह हिमालय के उपर भी उड़ान भर सकता है
  • राफेल अपने साथ काफी मिसाइल्स कैरी कर उड़ान भर सकता है
  • मेटेओर -बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर -टू -एयर, मीका मल्टी-मिशन एयर-टू-एयर, और स्कैल्प डीप-स्ट्राइक क्रूज़ जैसी बहुमुखी मिसाइलों से लैस है
  • स्कैल्प डीप-स्ट्राइक क्रूज़ मिसाइल जमीन से हवा में मारने भी सक्षम है, स्काल्प की रेंज करीब 300 किलोमीटर है
  • राफेल में तीन सिंगल सीटर और दो ट्विन सीटर विमान लैस है
  • राफेल में विभिन्न भारत-विशिष्ट संशोधन जिनमें इजरायल के हेलमेट-माउंटेड डिस्प्ले, रडार चेतावनी रिसीवर, लो-बैंड जैमर, 10 घंटे की फ्लाइट डेटा रिकॉर्डिंग, इन्फ्रा-रेड सर्च और ट्रैकिंग सिस्टम शामिल हैं
  • राफेल विमान की भार वहन क्षमता 9500 किलोग्राम है
  • यह अधिकतम 24,500 किलो तक के वजन के भार के साथ 60 घंटे की अतिरिक्त उड़ान भरने में सक्षम है
  • राफेल की 15.27 मीटर लंबा और 5.3 मीटर ऊंचा है. इसकी फ्यूल कैपेसिटी तकरीबन 17 हजार किलोग्राम है
  • राफेल 2,223 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से उड़ सकता है, एक मिनट में 60 हजार फुट की ऊंचाई तक की उड़ान भर सकता है
  • राफेल का राडार 100 किमी के भीतर एक बार में 40 टारगेट का पता लगा लगा सकता है, जिससे दुश्मन के विमान को पता चले बिना भारतीय वायुसेना उन्हें देख पाएगी

 

विश्वसनीय खूबियों से लैस  राफेल  फाइटर  जेट्स  भारत की सुरक्षा और लड़ाई में बेहद सूझबूझ के साथ शामिल किया गया है जिसका फायदा निर्धारित रूप में भारतीय वायु सेना को होगा |