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क्या SCO भारत-पाकिस्तान वार्ता को आसान बना सकता है- Defence India News

 

भारत-पाकिस्तान के बीच चली आरही कड़वाहट के बारे में सब बखूबी जानते और समझते है। भारत-पाकिस्तान का विभाजन 1947 में हुआ, उसके बाद भारत-पाकिस्तान के बीच हुई चार युद्ध- पहला युद्ध 1947-48 में, दूसरा युद्ध 1965 में , तीसरा युद्ध 1971 में, चौथा और आखिरी युद्ध 1999 में हुआ था जिसे कारगिल युद्ध के नाम से जाना जाता है। इन सभी युद्ध में हमेशा ही हार हुई है पाकिस्तान की।

इतने सालो से चले आरहे युद्ध के बाद आज के दिनों में भी भारत-पाकिस्तान के बीच सब कुछ सुलझने के बावजूद और उलझता चला गया। इन सभी के चलते रूस को उम्मीद है कि SMO भारत-पाकिस्तान वार्ता को भी आसान बना सकता है। रूस आशान्वित है और उसे लगता है शंघाई सहयोग संगठन (SCO) अपने दो हालिया सदस्यों, भारत और पाकिस्तान के लिए उत्प्रेरक बन सकता है , जो कि लंबे अरसे के बाद सीधी बातचीत शुरू कर सकता है।

SCO से मिली खबरों के मुताबिक, मंगलवार को रूसी दूतावास में मिशन के उप प्रमुख रोमन बाबूसकिन ने उम्मीद जताई कि भारत और पाकिस्तान सूट का पालन कर सकते हैं। रूसी तर्क यह था कि भारत और पाकिस्तान ने सामान्य मुद्दों पर SCO में एक साथ काम करने के बाद, वे अपनी सीमाओं पर द्विपक्षीय वार्ता में प्रवेश करने के लिए पर्याप्त विश्वास का निर्माण कर सकते हैं।

भारत और पाकिस्तान हाल ही में SCO में शामिल हुए थे जिसके मूल सदस्य रूस, चीन और चार मध्य एशियाई देश हैं। SCO में रक्षा मंत्रियों की पिछली बैठक के हाशिये पर, राजनाथ सिंह ने अपने चीनी समकक्ष के साथ सीमा तनाव पर चर्चा की।राजनाथ सिंह से चीन की वार्ता के समकक्ष में विदेश मंत्री एस जयशंकर जाएंगे जो SCO परिषद के विदेश मंत्रियों के साथ अपने चीनी समकक्ष वांग यी से मिलेंगे।

"SCO के बारे में महत्वपूर्ण बात यह है कि आपसी विश्वास का निर्माण करने और अंततः संवाद का विस्तार करने के लिए परिस्थितियों को बनाने के लिए सामान्य आधार पर सहयोग का विस्तार करने के लिए यह एक आरामदायक मंच है।"

भारत-पाकिस्तान के बीच विश्वास का निर्माण करने और अंततः संवाद का विस्तार करने के लिए SCO की मुलाकात कितनी महत्वपूर्ण साबित होती है साथ ही रूस की उम्मीद कि SMO भारत-पाकिस्तान वार्ता के लिए कारीगर साबित हो सकती है कितनी कुशल साबित होगी जल्दी ही अगले कुछ दिनों में पता चल जायेगा |